वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु में देव शुभकार्येषु सर्वदा।। या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता, या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुस्साक्षात परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः।। कायेन वाचा मनसेन्द्रिऐवा बुध्यात्मना वा प्रकृते स्वभावात। करोमि यद् यद् सकलं परस्मै नारायणायेति समर्पयामि।।

Home     About     Contact Us     Message     FAQ     Site Map      

2005 These documented Results of 4-Varn System can make you Proud of your Hindu heritage

free hit
counters
 

  

प्रार्थना

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।

निर्विघ्नं कुरु में देव शुभकार्येषु सर्वदा।। 

 

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,

या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।

या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर् देवैस्सदावन्दिता,

सा माम् पातु सरस्वती भगवती निश्शेषजाड्यापहा।। 

 

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

 

समर्पण

कायेन वाचा मनसेन्द्रिऐवा बुध्यात्मना वा प्रकृते स्वभावात।

करोमि यद् यद् सकलं परस्मै नारायणायेति समर्पयामि।।

Coming soon...


This page was last modified on Tuesday, 30 March 2010 03:15 AM