वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु में देव शुभकार्येषु सर्वदा।। या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता, या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुस्साक्षात परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः।। कायेन वाचा मनसेन्द्रिऐवा बुध्यात्मना वा प्रकृते स्वभावात। करोमि यद् यद् सकलं परस्मै नारायणायेति समर्पयामि।।

Home     About     Contact Us     Message     FAQ     Site Map      

 

श्रीकृष्ण बोले

तोड़ता हूँ अब मैं सब अपने वचन शस्त्र सन्यास के सब उपकरण।

धर्म रक्षा राष्ट्र रक्षा के लिए कर रहा हूँ आज मैं आयुध ग्रहण।

Aim for Protection of Sanaatan Dharm aka Hinduism and Creation of Hindu Raashtr