धरती माता का थोड़ा सा ऋण तो चुकाते जाइए, जाने से पहले

हिन्दू धर्म की रक्षा, यही हो लक्ष्य हमारा

अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मानक संख्या ISBN 978-81-89746-20-9 प्रकाशित 6 मई 2006

हिन्दू धर्म की रक्षा हेतु विद्यार्थियों, गृहस्थों एवं सन्यासियों का दायित्व, आज के संदर्भ में

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1]  यहाँ मैं उनकी बात नहीं कर रहा हूँ जो हिमालय की गुफ़ाओं में जा कर शरण लेते हैं - अपने-आपको उन प्रभावों से पूरी तरह बचाने के लिए

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2] आप सोचेंगे कि ऐसे लोग तो लाखों में हैं और उन्हें थोड़े से नहीं कहा जा सकता। मान लीजिए वे 10 लाख हैं। विश्व की जनसंख्या कोई 6.5 बिलियन आँकी जाती है। अर्थात, ऐसे व्यक्तियों की संख्या 0.015 प्रतिशत से भी कम हुई।  
3] उदाहरण के लिए कौरव पक्ष

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4] यहाँ मैं रास्तों में पड़े गंदगी की बात नहीं कर रहा हूँ, आशा है आप समझते होंगे

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5] आज के वातावरण में पल रहे हमारी संतानों के हृदय में हिंदू संन्यासियों के प्रति कोई विशेष श्रद्धा न रह जायेगी

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हिन्दू धर्म की रक्षा हेतु आप क्या कर सकते हैं

यदि आप इस बात से सहमत हैं कि हिन्दू धर्म की रक्षा हेतु आपका भी कुछ कर्तव्य बनता है तो मैं आपसे केवल यही प्रार्थना करूँगा कि  -

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आपकी युद्ध-नीति

कृपया उन पर अपना समय एवं अपनी ऊर्जा नष्ट न करें जो या तो आपकी कार्य प्रणाली पर आस्था नहीं रखते अथवा जो हिन्दू धर्म के विरोधी या निंदक हैं

उन लोगों पर पहले ध्यान दें जो बाड़े के करीब बैठे हैं, पर अभी भी बाड़े के दूसरी ओर ही बैठे हैं

पर एक बात  को सदा अपने ध्यान में रखें, कभी अपनी सोच से ओझल न होने दें

इस बात का पूरा ध्यान रखें कि यदि आप हिन्दू धर्म की रक्षा करना चाहते हैं तो आपको उन्हीं रार्स्तों पर चलना होगा  जिनकी शिक्षा हिन्दू धर्म देता है

6] इस संदर्भ में - समय को अपने जीवन काल की अवधि के मापदण्ड पर न आँकें

पर उसे हिन्दू (अनादि काल तक) बनाये रखने के लिए आपको कड़ी मेहनत करनी होगी

अन्त में इसका परिणाम क्या होगा?

फिर भी, मैं कुछ ऐसा अड़ियल हूँ कि बस भिड़ा हुआ हूँ, इस बात की परवाह किये बिना, कि मेरी चेष्टायें, आज के मापदण्ड पर, सफल कहलायी जायेंगी, या नहीं

कुछ भी तो रातों-रात नहीं हो जाता

जिन्होंने उस इमारत को ढहाया उन्हें भी काफ़ी काम करना पड़ा एवं प्रतीक्षा करनी पड़ी

मैं तो केवल बीज बोता चला जा रहा हूँ

कई वर्ष पहले जब यह पुस्तिका लिखी गई थी, उन दिनों यूनिकोड का प्रचलन नहीं था। इस कारण तब TTF ट्रूटाइप फ़ॉन्ट्स का प्रयोग किया गया था। अब उन अक्षरों का OTF (ओपन टाइप फ़ॉन्ट्स) यूनिकोड में रूपांतर एक सॉफ़्टवेयर द्वारा किया गया है। यह ग्यारह हज़ार की सॉफ़्टवेयर अच्छा काम करती है पर सभी सॉफ़्टवेयरों की अपनी-अपनी सीमायें होती हैं। अतः मशीनी रूपांतर से उत्पन्न हुई कतिपय गलतियों की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

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