जब अधर्म का हो बोलबाला, और धर्म का दम घुटता हो, तो उठती है एक आवाज़...

2003 09 - असत्य अन्याय रूपी अधर्म के विरुद्ध उठो अर्जुन भाग 1

हमें तो तलाश है उनकी,
जिनके दिन या रात चाहे सड़क पर बीतते हों या खेतों में मज़दूरी कर
,
पर आज भी जलती जिनके हृदय में मशाल है।

जो हिंदू अपने को जानते हैं,
जो हिंदू अपने को मानते हैं
,
और जिनकी साँस में बसती है हिंदुत्व की धारा।

जिनका ख़ून हिंदू है, जिनका ईमान हिंदू है, जिनकी सोच हिंदू है! 

 

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