मैं हिन्दू राष्ट्र की बात कर रहा हूँ, हिन्दी राष्ट्र की नहीं

हिन्दू राष्ट्र के संदर्भ में मन के आँगन में तैरते कुछ सोच  

7 मार्च 2012, 10:28 प्रातः / 13 मार्च 2012, 06:29 प्रातः भारतीय समय
मैं हिन्दू राष्ट्र की बात कर रहा हूँ, हिन्दी राष्ट्र की नहीं; और दोनों में बहुत बड़ा पार्थक्य (अंतर) है
असत्य के आधार पर हिन्दू राष्ट्र नहीं बन सकता — मानवी तोतों की कहानी, एक मूक दर्शक की जबानी
स्वार्थ से प्रेरित किसी भी सृजन का फल उत्तम नहीं होता
स्वार्थ केवल स्वतः का ही नहीं बल्कि समुदाय का भी हो सकता है
यह न केवल समाज के लिए बल्कि हिन्दू राष्ट्र के लिए भी घातक हो सकता है
अतः इसका विरोध प्रत्येक कदम पर तथा दृढ़ता के साथ होना चाहिए

संस्कृत एक मात्र भाषा है जिसमें राष्ट्रभाषा बनने की योग्यता है

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